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जैन श्वेताम्बर सोष्यल गु्रप्स फेडरेषन का स्वरूप

1. जैन श्वे. समाज की एकता, उन्नति, समृध्दि एवं संबध्दता के लिये संपूर्ण निष्ठा एवं सेवा भाव के साथ कार्य करना। जैन दर्षन एवं जैन सिध्दांतों को संपूर्ण भारत एवं विदेषों में प्रसारित करना।
2. जैन श्वे. समाज के धार्मिक, सामाजिक, नैतिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक उत्थान तथा कल्याणकारी राष्ट्रीय गतिविधियों के प्रति जागृति उत्पन्न करना। प्रतिभाषाली समाजजनों के स्वंय के विचार, स्वतंत्र रूप से, बुध्दिमानी पूर्वक प्रस्तुत करने के अवसर उपलब्ध करनवाना, प्रतिभा का सम्मान एवं विकास करना।
3. समाजसेवा के विभिन्न प्रकल्प तैयार कर उनका संचालन करना। षिक्षा चिकित्सा एवं रोजगार प्रदाय की योजनाएं हाथ में लेना।
4. समाज के युवक-युवतियांे में नेतृत्व एवं प्रषासकीय क्षमता तैयार करना ताकि वे आगे चलकर समाज, नगर, प्रदेष एवं देष को नेतृत्व एवं कुषल प्रषासन दे सकें। नेतृत्व एवं प्रषासन की दृष्टि से अवसर उपलब्ध करवाना।
5. पारस्परिक मिलन समारोह आयोजित करना, पारिवारिक परिचय विस्तार करना, मनोरंजन एवं सहभोज के माध्यम से मैत्री संबंध स्थापित करना, संस्कारिक वातावरण निर्मित करना, कला संस्कृति एवं धर्म भावना में वृध्दि करना।
6. समस्त जैन श्वे. सोष्यल गु्रप को संबध्दता देना, सहयोग करना एवं मार्गदर्षन देना।
7. समस्त गु्रप की कार्य प्रणाली एवं गतिविधियों को संयोजित, नियमित एवं आपसी समन्वय करना।
8. भारत के किसी भी हिस्से में या विदेषों में नवीन गु्रप्स की स्थापना करना, आगे बढ़ाना या गु्रप्स की सहायता करना।
9. समस्त गु्रप्स हेतु आवष्यक एवं उपयोगी साहित्य, पत्रिका अथवा बुलेटिन प्रकाषित करना।
10. सभी गु्रप्स अथवा कुछ गु्रप्स के साथ मिलकर संयुक्त रूप से सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, कार्यक्रम आयोजित करना, काॅन्फ्रेन्स, सेमिनार, कन्वेंषन एवं वर्कषाप का आयोजन करना।
11. ग्रप्स के लिये मानक संविधान का निर्माण करना।
12. गु्रप्स के लिये आचार संहिता बनाा।
13. उक्त सभी उद्ेष्यों की पूर्ति के लिये आवष्यक गतिविधियां करना।